
जौनपुर -शिराजे हिन्द जौनपुर की धरती पर जिलाधिकारी के रूप में डॉ. दिनेश चंद्र सिंह वह विशाल वटवृक्ष की तरह थे, जिसकी शीतल छाया में हर पीड़ित, हर वंचित और हर आशावान मन को विश्राम मिलता रहा। उनके स्थानांतरण की खबर सुन ऐसा लगा, जैसे तपते आकाश में वह छाया अचानक ओझल हो गई हो। वे केवल एक जिलाधिकारी नहीं, बल्कि कर्म और न्याय की निर्मल बहती सरिता थे—जो बिना भेदभाव हर द्वार तक पहुँचती थी और समस्या ग्रस्त हर खासो-आम सर्वहारा के लिए संकटमोचक बनकर जीवन में उजाला भरती थी।
पीली नदी के जीर्णोद्धार में उनका समर्पण मानो किसी तपस्वी की साधना थी, जो सूखी धरती में फिर से हरियाली और जीवन का संचार कर रही हो। और यही नहीं, वे संवेदनाओं के ऐसे सृजनहार भी थे, जिनकी लेखनी से “काल प्रेरणा” और “कर्मकुम्भ” जैसे विचारों के पुष्प खिले—जहाँ शब्दों में मानवता की सुगंध और समाज के प्रति गहरी करुणा झलकती है।
उनका प्रशासनिक कर्तव्य भी दरअसल उसी मानवीय संवेदना का विस्तार था—जैसे वटवृक्ष की जड़ें धरती के हर कोने तक जाकर उसे थामे रखती हैं। इसलिए वे केवल अधिकारी नहीं, बल्कि सच्चे जनसेवक के रूप में जन-जन के हृदय में बसे रहे।
आज जब वे निवर्तमान जिलाधिकारी के रूप में इस जनपद से विदा हो रहे हैं, तो जौनपुर मानो अपनी सृजनशीलता का एक अंश खो बैठा है—और आने वाले समय में यह धरती उस वटवृक्ष, उस सरिता, और उस संवेदनशील कवि-हृदय प्रशासक को बार-बार याद करेगी। आज जनपद जौनपुर के लोग इस बात को लेकर मायूस दिख रहे थे की वे अपने लोकप्रिय जिलाधिकारी जो शासन सत्ता के जनहितकारी कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर सार्थक रुप से सम्पादित करने वाले तेजतर्रार आफिसर से दूर हो रहे हैं। जनपद के प्रबुद्धजनो ने जिलाधिकारी डॉ.दिनेश चन्द्र के बेहतर कार्य प्रणाली की सराहना की है।


