
जौनपुर, 23 मई (सू0वि0)। लगातार बढ़ते तापमान और हीटवेव को देखते हुए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने जनपद के पशुपालकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी और आर्द्रता के कारण पशुओं में हीट स्ट्रेस की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिससे दुग्ध उत्पादन में कमी, शारीरिक कमजोरी और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
उन्होंने बताया कि छोटे बछड़े, अधिक दूध देने वाले पशु, गर्भित पशु, गहरे रंग के तथा अधिक वजन वाले पशु हीट स्ट्रेस से अधिक प्रभावित होते हैं। इसके लक्षणों में अत्यधिक हांफना, सूखी नाक, कमजोरी, पानी अधिक पीना, भोजन कम करना, दूध उत्पादन घटना और अचानक मृत्यु तक शामिल हैं। पक्षियों में चोंच खोलकर सांस लेना और पंख फैलाकर बैठना भी हीट स्ट्रेस के संकेत हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने पशुपालकों को सलाह दी कि पशुओं को छायादार एवं हवादार स्थान पर रखें तथा दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष सावधानी बरतें। पशुओं को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ और ठंडा पानी उपलब्ध कराया जाए। शेड में स्प्रिंकलर, मिस्ट फैन, एग्जॉस्ट फैन तथा फॉगिंग की व्यवस्था करने की भी सलाह दी गई।
उन्होंने कहा कि पशुओं को दिन में कम से कम दो बार ठंडे पानी से नहलाया जाए तथा भैंसों के लिए पानी में बैठने की व्यवस्था की जाए। शेड की छत पर भूसा, पराली या सफेद पेंट कराने से तापमान कम किया जा सकता है।
उन्होंने संतुलित आहार, हरा चारा, इलेक्ट्रोलाइट और मिनरल मिक्सचर के उपयोग पर भी जोर दिया। साथ ही स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों से सार्वजनिक स्थलों पर पशु-पक्षियों के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि हीट स्ट्रेस के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सालय से संपर्क करें। आवश्यकता पड़ने पर टोल फ्री नंबर 1962 पर भी सहायता प्राप्त की जा सकती है।


