
जौनपुर। नगर के बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं और अहिल्या उद्धार प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथावाचक शांतनु जी महाराज ने भगवान श्रीराम के प्राकट्य से लेकर उनकी बाल लीलाओं तक के प्रसंगों को प्रस्तुत करते हुए मर्यादा, करुणा, पारिवारिक संस्कार और नारी सम्मान के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु रामभक्ति में लीन नजर आए।प्रभु श्रीराम के प्राकट्य से अयोध्या में छाया उत्सव का उल्लासशांतनु जी महाराज ने भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप का वर्णन करते हुए बताया कि जब राजा दशरथ के राजमहल में माता कौशल्या की गोद में प्रभु श्रीराम की किलकारियां गूंजीं, तो अयोध्या में आनंद और उत्सव का वातावरण छा गया। रामजन्म की खुशी में अयोध्यावासी अपने-अपने स्थानों से प्रभु के दर्शन के लिए उमड़ पड़े। नगर में मंगलगीत गाए जाने लगे और उत्सव के बीच लोगों ने नृत्य कर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की।रामकथा के प्रसंग के अनुसार, भगवान श्रीराम के प्राकट्य की सूचना पाकर भगवान शिव, माता पार्वती और काकभुशुण्डि सहित अनेक दिव्य स्वरूपों के आगमन का वर्णन किया गया। इस प्रसंग ने कथा स्थल पर भक्ति और उल्लास का वातावरण निर्मित किया।महाराज जी ने भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं के माध्यम से बताया कि उनका जीवन प्रेम, विनम्रता, मर्यादा और पारिवारिक संस्कारों की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीराम का चरित्र माता-पिता के प्रति आदर, परिवार के प्रति स्नेह और समाज के प्रति कर्तव्यबोध का संदेश देता है।अहिल्या उद्धार प्रसंग में करुणा और कृपा का वर्णनकथा के दौरान महर्षि विश्वामित्र के साथ भगवान श्रीराम के मिथिला गमन और गौतम ऋषि के आश्रम पहुंचने का प्रसंग भी सुनाया गया। रामकथा के अनुसार, भगवान श्रीराम के चरण-स्पर्श से शापग्रस्त अहिल्या को मुक्ति प्राप्त हुई।शांतनु जी महाराज ने इस प्रसंग के माध्यम से भगवान श्रीराम की करुणा और कृपा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि अहिल्या उद्धार का प्रसंग आशा, मुक्ति और मानवीय गरिमा का संदेश देता है। यह कथा समाज में नारी के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा भी देती है।उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की प्रत्येक लीला में मानव जीवन के लिए कोई न कोई संदेश निहित है। इन प्रसंगों को केवल सुनने तक सीमित न रखकर उनके आदर्शों को व्यवहार में अपनाना चाहिए। मर्यादा, करुणा, पारिवारिक संस्कार और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे मूल्य जीवन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।भक्तिमय रहा कथा स्थल का वातावरणबीआरपी इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के विभिन्न प्रसंगों का श्रवण किया। कथा के बीच जय श्रीराम के जयकारे भी गूंजते रहे।

आयोजन के माध्यम से धार्मिक प्रसंगों और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जनमानस तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।कथा में शामिल हुए श्रद्धालुकथा के दौरान बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। भगवान श्रीराम के प्रसंगों के वर्णन के बीच पंडाल में जय श्रीराम के जयकारे भी लगे। कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों और धर्मप्रेमियों ने भाग लिया।यह श्रीराम कथा वरिष्ठ भाजपा नेता एवं समाजसेवी ज्ञान प्रकाश सिंह के सौजन्य से आयोजित की जा रही है।

कार्यक्रम का उद्देश्य धार्मिक प्रसंगों के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन, आदर्शों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े संदेशों को लोगों तक पहुंचाना है।इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक, वशिष्ठ सिंह, बी. पी. सरोज पूर्व सांसद मछली शहर, पम्मू सिंह चितौड़ी, नीरज नीरज मौर्या, कुंवर वीरेन्द प्रताप सिंह, वीरेंद्र सिंह देवकली, मुरारी पाण्डेय, वाराणसी, दिनेश टंडन, संदीप सिंह पूर्व ब्लॉक प्रमुख जलालपुर, संतोष अजय सिंह सुग्गु, अजय सिंह अध्यक्ष बी जे. पी. मछली शहर अमित सिंह, सुमित सिंह दीपक सिंह शिवा, सिंह सुनील सिंह आसुतोष सिंह बबलू समाजसेवी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।


