माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं : पं. रजनीकांत द्विवेदी


श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन मानव जीवन, संस्कार और मातृ ऋण का बताया महत्व
व्यासपीठ से विनीत सेठ ने लिया आशीर्वाद
जौनपुर। नगर के विवाह मैरेज लॉन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने मानव जीवन, संस्कार, धर्म और माता-पिता की सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानव जीवन बड़े भाग्य से मिलता है। यदि मनुष्य के मन में धर्म के प्रति श्रद्धा नहीं है तो उसका जीवन व्यर्थ हो जाता है। माता-पिता की सेवा करना सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्यों में से एक है। उनकी सेवा से व्यक्ति को जीवन में सुख, संतोष और पुण्य की प्राप्ति होती है।
कथाव्यास पं. रजनीकांत द्विवेदी ने कहा कि आकाश से गिरने वाली वर्षा की बूंदें जिस पात्र में पड़ती हैं, उसी के अनुसार उनका स्वरूप और उपयोग निर्धारित होता है। इसी प्रकार हम सभी इस धरती पर अमृत की बूंद के समान आए हैं। हमें परिवार और समाज से जैसे संस्कार मिलते हैं, उसी के अनुरूप हमारा जीवन धर्म और सदाचार की दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने कहा कि जीवन में अच्छे संस्कारों का विशेष महत्व है। मनुष्य को सदैव धर्म, सेवा और परोपकार के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने मानव जीवन की तुलना फूटे हुए घड़े में रखे जल से करते हुए कहा कि आयु निरंतर कम होती रहती है, इसलिए समय का सदुपयोग करना चाहिए।
पं. रजनीकांत द्विवेदी ने कहा कि मनुष्य पर मातृ ऋण, देव ऋण और पितृ ऋण सहित विभिन्न दायित्व होते हैं। पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों से देव ऋण की पूर्ति होती है, लेकिन माता-पिता के प्रति हमारा कर्तव्य जीवनभर बना रहता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास समय की कमी है तो वह मंदिर भले न जाए, लेकिन उसे अपने माता-पिता की सेवा अवश्य करनी चाहिए। जो पुत्र जीवित रहते माता-पिता की सेवा करता है, उसे जीवन में बहुत कुछ सहज ही प्राप्त हो जाता है।
उन्होंने कहा कि माता-पिता के निधन के बाद बड़े पैमाने पर भोज कराने की अपेक्षा उनके जीवित रहते उनकी सेवा करना अधिक महत्वपूर्ण है। भाग्यशाली पुत्र वही है, जो माता-पिता के मार्गदर्शन में रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता है। उन्होंने मृत्यु को जीवन का स्वाभाविक सत्य बताते हुए कहा कि व्यक्ति को जीवन रहते अपने दायित्वों को पूरा करना चाहिए। माता-पिता के निधन के बाद गया में पिंडदान करने की धार्मिक परंपरा का भी उन्होंने उल्लेख किया।
श्रीमद्भागवत कथा की मुख्य यजमान विमला सेठ हैं। कथा प्रारंभ होने से पहले विवेक सेठ व विनीत सेठ ने व्यासपीठ की आरती उतारी और कथाव्यास से आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर विशाल सेठ, विपिन सेठ, हर्षित सेठ, हार्दिक सेठ, नीरज शाह, नीलम, उमा, ममता, विभा, चंद्रशेखर, आलोक, अजय समेत गठना कोठी परिवार के सदस्य और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

  • Related Posts

    जौनपुर -श्रीराम की बाल लीलाओं और अहिल्या उद्धार के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोरअयोध्या में प्रभु श्रीराम के प्राकट्य का मनोहारी वर्णन, अहिल्या उद्धार प्रसंग से मिला करुणा और मर्यादा का संदेश

    जौनपुर। नगर के बीआरपी इंटर कॉलेज परिसर में चल रही श्रीराम कथा के तीसरे दिन भगवान श्रीराम की बाल लीलाओं और अहिल्या उद्धार प्रसंग…

    Continue reading
    रामकथा सुनना सौभाग्य की बात, भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने की जरूरत : शांतनु जी महाराज

    बी.आर.पी. कॉलेज परिसर में रामकथा के दौरान श्रद्धालुओं को मिला भक्ति, संस्कार और मर्यादा का संदेश, आयोजक ज्ञान प्रकाश सिंह के प्रयासों की सराहना…

    Continue reading

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    माता-पिता की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं : पं. रजनीकांत द्विवेदी

    जौनपुर -श्रीराम की बाल लीलाओं और अहिल्या उद्धार के प्रसंग ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोरअयोध्या में प्रभु श्रीराम के प्राकट्य का मनोहारी वर्णन, अहिल्या उद्धार प्रसंग से मिला करुणा और मर्यादा का संदेश

    जौनपुर -शहर में आज निकाली जाएगी भव्य कलश यात्रा,शहर‌ की प्रतिष्ठित फर्म गहना कोठी परिवार की तरफ से विवाह मैरेज हॉल में 23अकटूबर से 29अकटूबर तक होगा धार्मिक अनुष्ठान-विवेक सेठ एंड ब्रदर्स

    वाराणसी खंड स्नातक /खण्ड शिक्षक निर्वाचन के मद्देनजर कलेक्ट्रेट के समस्त न्यायालय 2230 अक्टूबर को अधिकारियों के लिए होंगे बंद- सैमुअल पाल एन,जिला निर्वाचन अधिकारी/जिलाधिकारी

    रामकथा सुनना सौभाग्य की बात, भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने की जरूरत : शांतनु जी महाराज

    वरिष्ठ भाजपा नेता ज्ञान प्रकाश सिंह की अगुवाई में निकली ऐतिहासिक कलशयात्रा