
किताबों के ज्ञान के साथ तकनीक दक्षता भी जरूरीः गौरव गौतम
कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट पेश की
जनसंचार विभाग के शुभम गुप्ता को मिला अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक
जौनपुर 27 जुलाई, 2026 (सू0वि0) – वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30 वां दीक्षांत समारोह सोमवार को महंत अवेद्यनाथ संगोष्ठी हाल में मनाया गया। इस अवसर पर माननीय कुलाधिपति, श्री राज्यपाल उत्तर प्रदेश श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले स्नातक एवं स्नातकोत्तर 83 मेधावियों (31 छात्र एवं 52 छात्राएं) को 84 स्वर्ण पदक प्रदान की। 339 शोधार्थियों को पीएच.डी. एवं एक को डीएससी की उपाधि दी। 39 छात्राओं को एचपीबी वैक्सीनेशन हुआ।

कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ज्ञान, साधना और परिश्रम की इस पावन धरती पर आकर स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस कर रही हूं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और चरित्र निर्माण की प्रयोगशालाएं हैं। विद्यार्थियों को अपने भविष्य के साथ-साथ भारत के भविष्य को भी दिशा देने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह के परिणाम यह संकेत दे रहे हैं कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने में छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि शोध के क्षेत्र में अभी भी छात्र आगे हैं। उन्होंने छात्रों का आह्वान किया कि वे अधिक परिश्रम करें और छात्राओं से प्रेरणा लें। बेटियां अपने भविष्य के प्रति अधिक सजग हैं और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने बेटियों की शिक्षा की सराहना करते हुए कहा कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी अपने परिवार, समाज, विश्वविद्यालय और देश का गौरव हैं।
राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में अनेक राज्य एवं निजी विश्वविद्यालय महापुरुषों के नाम पर स्थापित हैं। ऐसे सभी विश्वविद्यालयों में उन महापुरुषों के जीवन, विचारों और योगदान पर आधारित भाषण, चित्रकला, निबंध एवं अन्य प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनसे परिचित हो सके। इससे विश्वविद्यालयों की विलुप्त होती गौरवशाली परंपराओं और स्मृतियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल रोजगार खोजने की मानसिकता तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार देने वाले उद्यमी बनने का लक्ष्य रखें। आज भारत का युवा स्टार्टअप, नवाचार और तकनीक के माध्यम से दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि देश के युवा अंतरिक्ष विज्ञान, रक्षा, सेमीकंडक्टर, कृषि एवं आधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के युवाओं ने कम उम्र में रॉकेट निर्माण जैसे नवाचार किए हैं, वहीं ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में भी भारतीय युवाओं की प्रतिभा विश्व स्तर पर पहचान बना रही है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व के सबसे युवा देशों में शामिल है और यही युवा शक्ति विकसित भारत के निर्माण का आधार बनेगी। विद्यार्थियों को अपने सपनों को संकल्प में बदलना होगा तथा समाज, राष्ट्र और मानवता के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा। शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन और चरित्र निर्माण भी उतना ही आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि मा0प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए नशा-मुक्त भारत, स्वस्थ भारत और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने एचपीवी वैक्सीनेशन अभियान की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में बालिकाओं का सफल टीकाकरण किया गया है। विश्वविद्यालय में भी सैकड़ों छात्राओं का टीकाकरण कराया गया, जो महिला स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन, मुख्य विकास अधिकारी, जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, स्वास्थ्य विभाग तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की सराहना करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही ऐसे अभियान सफल होते हैं और स्वस्थ एवं विकसित समाज का निर्माण संभव है।
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि मेजर जनरल गौरव गौतम (एडीजी, उ.प्र. एनसीसी) ने दीक्षांत समारोह में उपस्थित छात्रों का हृदय से अभिवादन करते हुए कहा कि आज का पराक्रमी युवा राष्ट्र की पहली पंक्ति है। उन्होंने कहा कि सिर्फ किताबों का ज्ञान ही पर्याप्त नहीं; तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक कौशल और आत्मनुशासन आज की मांग हैं। मेजर जनरल ने एससीसी के अनुभवों से उदाहरण देते हुए अनुशासन, टीम वर्क और नेतृत्व की आवश्यकता पर जोर दिया तथा कहा कि ये गुण किसी भी करियर को ऊँचाइयाँ प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे एआई, डेटा साइंस और उद्यमशीलता जैसे भविष्योन्मुख क्षेत्र में खुद को प्रशिक्षित करें और रोजगारोन्मुखी कौशल सीखें ताकि वे प्रतिस्पर्धी बाजार में सफल हो सकें। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को समान महत्व देते हुए उन्होंने नियमित व्यायाम, संतुलित जीवनशैली और मानसिक सुदृढ़ता पर बल दिया। साथ ही सामाजिक दायित्वों स्वच्छता, स्त्री सम्मान और सामुदायिक सेवा का निर्वाह करने की बात कही। वित्तीय विवेक के संदर्भ में मेजर जनरल ने बचत और दीर्घकालिक योजना बनाने की सलाह दी। उन्होंने प्रतिभाओं को नैतिकता और ईमानदारी के साथ काम करने का संदेश दिया और स्नातकों से अनुरोध किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल को समाज और राष्ट्र के विकास के लिए समर्पित करें।
विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा मा0 राज्यमंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आज प्राप्त होने वाला पदक और उपाधि केवल विद्यार्थियों की उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके माता-पिता, गुरुजनों और विश्वविद्यालय परिवार के वर्षों के परिश्रम एवं समर्पण का सम्मान है। उन्होंने सभी पदक एवं उपाधि प्राप्त विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज से उनके जीवन का एक नया अध्याय प्रारंभ हो रहा है। विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास के बल पर वे न केवल स्वयं आगे बढ़ें, बल्कि समाज को भी शिक्षित, जागरूक और सशक्त बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। श्रीमती रजनी तिवारी ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए कौशल विकास और तकनीकी शिक्षा को लगातार बढ़ावा दे रही है। वर्तमान समय में तकनीकी दक्षता और नवाचार की समझ युवाओं की सफलता की आधारशिला है। उन्होंने विद्यार्थियों से आधुनिक तकनीक को अपनाते हुए देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास का भी केंद्र होता है। शिक्षा राज्यमंत्री ने बेटियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज बेटियां विज्ञान, चिकित्सा, प्रशासन, शिक्षा, अनुसंधान और सेवा सहित प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के साथ चुनौतियां अवश्य आएंगी, लेकिन दृढ़ संकल्प, परिश्रम और सकारात्मक सोच से हर कठिनाई का समाधान निकाला जा सकता है।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने माननीय कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि मेजर जनरल गौरव गौतम, अतिथि गणों तथा विद्यार्थियों का स्वागत एवं अभिवादन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षिक और शोध की प्रगति का उल्लेख करते हुए एशिया एवं भारत रैंकिंग, एच-इन्डेक्स और प्रकाशन के आंकड़े बताए। कहा कि “शोध प्रोत्साहन एवं उत्कृष्टता नीतिदृ2025“, 205 शोध-पत्र, 10 ग्रांटेड पेटेंट और डीएसटी- पर्स तथा पीएम-ऊषा अनुदान जैसी उपलब्धियों से विश्वविद्यालय गौरवान्वित हुआ है। विश्वविद्यालय में आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस आधारित पहलों, नए पाठ्यक्रम ( एआई/ एमएल, डेटा साइंस, बीएस-सी बायोटेक आदि), एग्रो-ए डब्ल्यू एस स्थापना तथा एआई वर्कशॉप का जिक्र किया गया। सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्यक्रमों दृ पौधरोपण, एसएसएस गतिविधियाँ, स्मार्ट क्लासरूम, लॉ लाइब्रेरी स्थापना, एनसीसी यूनिट और प्लेसमेंट वृद्धि को भी रेखांकित किया गया। प्रशासनिक सुधारों (जीरो डिपेंडेंसी), वित्तीय सुदृढ़ता और आईएसओ प्रमाणन से संस्थागत क्षमता बढ़ने का उल्लेख किया गया। कुलपति ने स्नातकों को ज्ञान, नीतिशीलता और सामाजिक दायित्व के साथ देश-और समाज की सेवा करने के लिए शुभकामना दी।
समारोह में कुलपति प्रो. वंदना सिंह ने कुलाधिपति को अंगवस्त्रम, स्मृति चिह्न और जौनपुर में निर्मित चमेली का इत्र देकर सम्मानित किया। मुख्य अतिथि और शिक्षा राज्यमंत्री का भी इसी क्रम में सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. मनोज मिश्र ने किया। इस अवसर पर कार्य परिषद के सदस्य, विद्या परिषद के सदस्यों के साथ कुलसचिव डॉ. विनोद सिंह, वित्त अधिकारी आत्म प्रकाश धर द्विवेदी, प्रो. वीके पांडेय, प्रो. मानस पांडेय, प्रो अविनाश पाथर्डीकर, प्रो. प्रमोद यादव, प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. अजय द्विवेदी, प्रो. रजनीश भास्कर, प्रो. रवि प्रकाश, डा. विजय सिंह, डॉ. राहुल सिंह, प्रो. रजनीश भास्कर, प्रो. प्रदीप कुमार, प्रो. मिथलेश सिंह, प्रो. गिरधर मिश्र, डॉ. रसिकेश, डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव, डॉ. अन्नू त्यागी, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर, कर्मचारी संघ के महामंत्री राधेश्याम सिंह मुन्ना, नंदकिशोर सिंह, रमेश यादव, सुशील प्रजापति समेत विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने बच्चों को उपहार स्वरूप शिक्षा-सामग्री वितरित की – प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने दीक्षांत के पावन अवसर पर प्राइमरी के नन्हे-मनोरथों को स्कूल बैग, फल, ड्राई फ्रूट जामेट्री बॉक्स तथा महापुरुषों पर प्रकाशित पुस्तकें भेंट कीं। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए कुकड़ीपुर, देवकली, सुल्तानपुर और जासोपुर,जफरपुर गांवों में आयोजित खेलों के प्रथम तीन विजेताओं को भी राज्यपाल के हाथों विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके बाद 15 स्कूली बच्चे देशभक्ति और लोकगीत 3 बच्चे पर्यावरण और जलबचाव पर गीत सुनाकर लोगों को भावुक कर दिया। जिससे बच्चों के सपनों को उज्जवल प्रोत्साहन मिला।
शुभम गुप्ता को अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक – जनसंचार विभाग में एम.ए. जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में एमए में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले शुभम गुप्ता को अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। इसी के साथ शुभम गुप्ता को दो स्वर्ण पदक मिले।
83 मेधावियों को 84 स्वर्ण पदक – राज्यपाल श्रीमती पटेल ने 83 छात्र-छात्राओं को उनके प्रथम-स्पर्धा प्रावीण्य के लिए कुल 84 स्वर्ण पदक (31 छात्र एवं 52 छात्राएं) प्रदान किए। विज्ञान संकाय में डॉ.मुकेश कुमार झोपे को डी. एससी की उपाधि प्रदान की गई। स्नातक और परास्नातक स्तरों पर यह सांस्कृतिक और अकादमिक उत्कृष्टता का उत्सव रहा।
339 शोधार्थियों को पीएच.डी., एक को डीएससी उपाधि – दीक्षांत समारोह में कुल 339 शोधार्थियों को डॉक्टरेट की उपाधि दी गई। कला संकाय में सर्वाधिक 221, इसके बाद शिक्षा 35, विज्ञान 40, कृषि 14 तथा अन्य संकायों में कुल मिलाकर 339 उपाधि दी गई। इसमें पुरुष और महिलाओं का सम्यक योगदान दिखा, जो विश्वविद्यालय की शोध-शक्ति का दर्पण है।
गतिमान पत्रिका का हुआ लोकार्पण – विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में वार्षिक पत्रिका “गतिमान“ का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने पत्रिका का अनावरण किया। पत्रिका में वर्ष भर की महत्वपूर्ण गतिविधियाँ, स्वर्ण पदक विजेताओं के गौरवमय क्षण और प्रतिष्ठित अतिथियों के प्रेरक विचार शामिल हैं। हर पृष्ठ पर विश्वविद्यालय की उपलब्धियाँ, शोध कार्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शैक्षिक गतिविधियाँ स्पष्ट और रोचक तरीके से प्रस्तुत की गई हैं। विमोचन समारोह में कुलपति, दीक्षांत के मुख्य अतिथि के साथ साथ प्रधान संपादक डॉ. मनोज मिश्र, संपादक डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर और संपादन मंडल के डॉ. सुनील कुमार, डॉ. अन्नू त्यागी, डॉ. श्याम कन्हैया, डॉ.चंदन सिंह और डॉ. शशिकांत डॉ.लक्ष्मी प्रसाद मौर्य, पंकज सिंह भी उपस्थित रहे। “गतिमान“ पत्रिका न केवल घटनाओं का संकलन है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की प्रगति और सामूहिक प्रयासों का जीवंत दस्तावेज है जो पाठकों को प्रेरित करता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों को राज्यपाल ने किट सौंपे – 500 आंगनबाड़ी किट का वितरण किया गया। इसमें 100 किट वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, 200 आंगनबाड़ी किट जिला प्रशासन जौनपुर और 200 किट जिला प्रशासन गाजीपुर की ओर से दिया गया, जिसके लिए मा0 राज्यपाल ने सराहना की। गोद ली गई ग्रामीण आंगनबाड़ियों तथा अन्य के लिए 67 वस्तुओं के किट (ट्राइसाइकिल, झूला, स्टोरी बुक, व्हाइट बोर्ड, कुर्सी, किडनी सेप टेबल, हार्स राइडिंग आदि) का वितरण कर मा0 राज्यपाल ने बाल विकास एवं सामुदायिक सशक्तिकरण को महत्वपूर्ण ताकत दी।
इस दौरान जिलाधिकारी सैमुअल पाल एन., मुख्य विकास अधिकारी ध्र्रुव खाड़िया, मुख्य विकास अधिकारी गाजीपुर आलोक प्रसाद के साथ-साथ विश्वविद्यालय के सीएसआर प्रतिनिधि आनन्द कुमार, उप महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक वाराणसी मंडल भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुलाधिपति ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी जौनपुर और मुख्य विकास अधिकारी गाजीपु को एचपीवी टीकाकरण प्रमाण पत्र तथा चुनौतियां मुझे पसंद है पुस्तक भेंट की गई। यह पुस्तक माननीय कुलाधिपति जी के जीवनवृत्त को समेटे हुए अनुपम कृति है।
डीजी लॉकर में डिग्रियाँ हुईं अपलोड – डिजिटल क्रान्ति का जीवंत उदाहरण देते हुए राज्यपाल ने आईपैड पर बटन दबाकर 2025-26 की स्नातक एवं स्नातकोत्तर की 77463 डिग्रियों को डिजीलॉकर में अपलोड कराया। उपकुलसचिव अजीत सिंह ने प्रक्रिया को सुचारु रूप से संचालित किया। इससे विद्या के प्रमाण डिजिटल, त्वरित और सुरक्षित हुए।

दीक्षोत्सव कार्यक्रम की लघु फिल्म का प्रसारण – विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में सम्पन्न दीक्षोत्सव के रंगीन और गरिमापूर्ण क्षणों पर आधारित यह लघु फिल्म प्रदर्शित की गई। इस मार्मिक एवं सूक्ष्म दृष्यावली का निर्देशनात्मक परिचय डॉ. चंदन सिंह द्वारा दिया गया, जिनके शब्दों ने कार्यक्रम की गरिमा और विश्वविद्यालय की आत्मा को सहजता से उद्घाटित किया। फिल्म ने न केवल दीक्षान्त समारोह के औपचारिक अनुष्ठानों को पटकथा का रूप दिया, बल्कि उन छोटे-छोटे पलों को भी संजोया जिनमें विद्यार्थी, शिक्षक और कर्मचारी मिलकर शिक्षा के पर्व को एक सांस्कृतिक उत्सव में परिवर्तित करते हैं।
इंडोर स्टेडियम का अभिवृद्धि और आनंदी वाटिका का उद्घाटन – इंडोर स्टेडियम के स्वरूप में किए गए उत्कर्ष ने विश्वविद्यालय के खेल और उत्सवों को नई ऊचाइयों में पहुँचाया है, जहाँ उत्साह और अनुशासन का संगम सजीव होगा। महिला छात्रावास में निर्मित “आनंदी वाटिका“ एक सूक्ष्म स्वर्ग की तरह खिल उठा है, जहां शान्ति, सौंदर्य और स्नेहमयी साथ मिलकर छात्राओं के सशक्त अनुभव को पोषित करेंगे। दोनों उद्घाटन न केवल भौतिक संरचना का संवर्धन हैं, बल्कि विश्वविद्यालय के समृद्धि और समावेशन की प्रतिबद्धता के प्रतीक भी हैं।
छः पुस्तकों का विमोचन – वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में विभिन्न विषयों पर केंद्रित छः पुस्तकों का विमोचन किया गया। इनमें मुराद अली की ‘टीम बिल्डिंग एंड लीडरशिप’ तथा ‘फाइनेंसिंग न्यू बिजनेस वेंचर’, प्रो. गिरिधर मिश्र की ‘टीनों और ऊर्जा की अद्भुत दुनिया’, डॉ. आलोक गुप्ता की ‘फाउंडेशन ऑफ फाइनेंशियल मॉडलिंग एंड मॉडर्न अकाउंटिंग स्ट्रेटजी’, डॉ. जान्हवी श्रीवास्तव की ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ तथा डॉ. प्रियंका कुमारी सिंह की ‘संघर्ष से अस्तित्व तकः एक स्त्री की यात्रा’ एवं ‘भारतीय समाज में विधवा महिलाओं की परिस्थिति’ पुस्तकों का विमोचन किया गया।
चार शिक्षकों को दिया उत्कृष्ट पुरस्कार – ज्ञान, समर्पण और सतत शैक्षणिक साधना को सम्मानित करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय एवं उत्कृष्ट योगदान देने वाले चार शिक्षकों को उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान से अलंकृत किया गया। सम्मानित होने वालों में टी.डी. कॉलेज, जौनपुर के प्राचार्य प्रो. राम आसरे सिंह, टीडी कालेज के डॉ. विशाल सिंह, राष्ट्रीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जमुहाई के डॉ. प्रशांत सिंह तथा वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) शोध संस्थान के डॉ. धीरेंद्र कुमार चौधरी सहित कुल चार शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
- वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थी को स्वर्ण पदक प्रदान करतीं कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि एवं अन्य।
- एम.ए. जनसंचार में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले शुभम गुप्ता को अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक प्रदान करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।
- आईपैड का बटन दबाकर स्नातक एवं स्नातकोत्तर की डिग्रियां डिजीलॉकर में अपलोड करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।
- जौनपुर एवं गाजीपुर के आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए किट प्रदान करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।
- विश्वविद्यालय की वार्षिक पत्रिका ‘गतिमान’ सहित विभिन्न पुस्तकों का विमोचन करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल एवं अन्य अतिथि।
- विभिन्न संकायों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान करतीं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल।
- विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों के विजेता बच्चों को पुरस्कार प्रदान करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।
- वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि गौरव गौतम , उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, कुलपति प्रो. वंदना सिंह एवं अन्य अतिथि।
- वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के 30वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करतीं कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल।
- 30वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते मुख्य अतिथि मेजर जनरल गौरव गौतम।
- 30वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करतीं उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी।
- 30वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए संबोधित करतीं कुलपति प्रो. वंदना सिंह।
- स्वर्ण पदक धारकों के साथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्य अतिथि गौरव गौतम , उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, कुलपति प्रो. वंदना सिंह



