छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सार्वजनिक परीक्षा में अधिक पारदर्शिता लाना है:डॉ. दिनेश चंद्र

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की परीक्षा सकुशल संपन्न कराए जाने के संबंध में हुई बैठक

जौनपुर – जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परिषदीय हाईस्कूल/इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 सकुशल संपन्न कराए जाने के संबंध में बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिलाधिकारी के द्वारा अवगत कराया गया कि हाईस्कूल/इण्टर) परीक्षा वर्ष-2025, 24 फरवरी 2025 से प्रारम्भ होकर 12 मार्च 2025 के मध्य में दो पालियों में (प्रथम पाली समय-प्रातः 8ः30 बजे से 11.45 बजे तक, द्वितीय पाली सायं 2.00 बजे से 5.15 बजे तक) की अवधि में आयोजित होगी।


कक्षा-10 में कुल पंजीकृत परीक्षार्थियों की संख्या 74938, कक्षा-12 में कुल पंजीकृत परीक्षार्थियों की संख्या 80164, वर्ष 2025 में कुल परीक्षार्थियों की संख्या 155102 है। कुल 218 परीक्षा केन्द्र बनाये गये है। जिसके लिए जोनल मजिस्ट्रेट 06, सेक्टर मजिस्ट्रेट 23 एवं स्टैटिक मजिस्ट्रेट 218 तैनात किये गये हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन में अनुचित साधनों का प्रयोग एवं प्रश्न पत्रों के समय से पूर्व प्रकटन को रोकने, साल्वर गिरोह का निषेध करने और संबंधित सभी मामलों में दंड की व्यवस्था करने के लिए 2024 में नवीन अधिनियम बनाया गया है।

इस अधिनियम का उद्देश्य छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए सार्वजनिक परीक्षा में अधिक पारदर्शिता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता लाना है। इसमें छात्रों को उनके भविष्य के दृष्टिगत आपराधिक दायित्व से मुक्त रखा गया है परंतु सार्वजनिक परीक्षाओं को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाले दोषियों के विरुद्ध निर्णायक और कठोर कार्रवाई का प्राविधान किया गया है।

सार्वजनिक परीक्षा के संचालन में सम्मिलित प्रश्न पत्र की तैयारी, कोडिंग डिकोडिंग, मुद्रण. संग्रहण, सुरक्षित अभिरक्षा और वितरण, सार्वजनिक परीक्षा का पर्यवेक्षण, उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन, परिणाम की घोषणा और उससे संबंधित अन्य सभी कार्य किये गये है।


परीक्षार्थी के संदर्भ में किसी व्यक्ति से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से या किसी भी रूप में अनधिकृत सहायता लेना या किसी प्रकार के अनधिकृत गैजेट या का उपयोग करना, परीक्षार्थी के अलावा अन्य व्यक्ति के संदर्भ में अनधिकृत रूप से प्रश्न पत्र के प्रकटन या प्रकटन का प्रयास, किसी सार्वजनिक परीक्षा में किसी भी परीक्षार्थी को किसी भी तरीके से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करना या सहायता करने का प्रयास करना, और परीक्षार्थी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए कंप्यूटर नेटवर्क या संसाधन या प्रणाली के साथ छेड़छाड़ करना या करने का प्रयास करना इस अधिनियम के दायरे में आयेगा।


सॉल्वर गिरोह का आशय परीक्षा संस्था के अधिकारी या कर्मचारी और सार्वजनिक परीक्षा के संचालन के लिए लगाए गए संस्था के प्रबंधन या कर्मचारी को छोड़कर ऐसा व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह है जो वास्तविक परीक्षार्थी के स्थान पर उपस्थित या उपस्थित होने का प्रयास करने वाला व्यक्ति, सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित प्रश्न पत्र को परीक्षा से पहले भौतिक या किसी अन्य माध्यम से प्राप्त कर परीक्षार्थियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके सहायता करने वाला व्यक्ति, या परीक्षार्थी को अनुचित लाभ प्रदान करने के लिए किसी भी तरीके से सम्मिलित होने वाला व्यक्ति से है।
अधिनियम की धारा 14 में किसी व्यक्ति को सार्वजनिक परीक्षा संचालन विषयक कोई सौंपा गया कार्य या कर्तव्य पूरा न करने की दशा में संबंधित व्यक्ति को अधिकतम 7 वर्ष कारावास और जुर्माने, सार्वजनिक परीक्षा संचालन हेतु नियुक्त किसी भी व्यक्ति को धमकी, प्रलोभन या बल प्रयोग द्वारा परीक्षा को प्रभावित करने या करने का प्रयास करने वाले किसी भी व्यक्ति को धारा 13 (4) में 10 वर्ष तक कारावास और 10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है।
साल्वर गिरोह के व्यक्ति द्वारा ऐसा करने पर धारा 13 (5) में आजीवन कारावास और 01 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान। परीक्षा केंद्र से भिन्न किसी अन्य स्थान का प्रयोग सार्वजनिक परीक्षा के लिए करने पर धारा 13(3) में 10 वर्ष तक का कारावास और 5 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है।
यदि परीक्षा के संचालन में अपने कर्तव्यों के आधार पर प्राधिकृत व्यक्ति परीक्षा केंद्र पर परीक्षार्थी को प्रश्न पत्र खोलने और वितरित करने के लिए नियत समय से पूर्व प्रश्नपत्र को खोलेगा या कोई व्यक्ति न्यस्त कार्य के आधार पर ज्ञात कोई जानकारी किसी को देगा तो संबंधित व्यक्ति को धारा 13(3) में 10 वर्ष तक कारावास और 5 लाख तक जुर्माने का प्राविधान है।
ऐसे व्यक्ति को परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने या प्रवेश का प्रयास करने पर 10 साल तक कारावास एवं 05 लाख तक जुर्माने का प्राविधान जिसे सार्वजनिक परीक्षा से संबंधित कोई कार्य नहीं दिया गया है और जो परीक्षार्थी भी नहीं है।
परीक्षा संस्था के अधिकारी/कर्मचारी अथवा परीक्षा के संचालन के लिए लगाए गए संस्था के प्रबंधन/कर्मचारी द्वारा परीक्षार्थी को अनुचित सहायता देने या देने का प्रयास करने पर 10 साल तक के कारावास एवं 10 लाख तक के जुर्माना का प्राविधान है।
पुलिस अधीक्षक डा0 कौस्तुभ ने बताया कि विभाग के द्वारा स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए सशस्त्र बल की व्यवस्था, बाह्य नकल की रोकथाम के लिए सम्बन्धित क्षेत्राधिकारी/ थानाध्यक्ष की पेट्रोलिंग। केन्द्र व्यवस्थापकों की सुरक्षा व्यवस्था विषयक समस्याओं का त्वरित निदान। बाधक तत्वों के विरूद्ध नवीन अधिनियम -संज्ञेय अपराध के अन्तर्गत कार्यवाही,सचल दल हेतु सशस्त्र पुलिस बल की व्यवस्था, परीक्षा केंद्र के स्ट्रांग रूम में एडिशनल सेट की सुरक्षित अभिरक्षा, अनुचित मुद्रण अथवा प्रकाशन तथा अफवाह आदि पर कठोर कार्यवाही, परीक्षा के पश्चात् उत्तर पुस्तिका संकलन केन्द्र तथा मूल्यॉकन केन्द्र पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।


इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी भू0 राजस्व अजय अम्बष्ट,नगर मजिस्ट्रेट इन्द्र नन्दन सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी डा0 गोरखनाथ पटेल, सहित शान्ति समिति के पदाधिकारीगण सहित अन्य उपस्थित रहे।

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