
किसान का बेटा बना डाक्टर, कुछमुछ गांव में छायी खुशी
पुष्पेन्द्र यादव ने डाक्टर बनकर पिता का सिर गर्व से किया ऊंचा
धर्मापुर, जौनपुर। स्थानीय विकास खण्ड के कुछमुछ गांव से निकली एक कहानी आज पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गई है। किसान परिवार में जन्मे एक बेटे ने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और संघर्ष के बल पर वह मुकाम हासिल किया है जो हर माता-पिता का सपना होता है। कुछमुछ निवासी वीर बहादुर यादव उर्फ पप्पू वर्षों से खेती-किसानी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनके बड़े बेटे पुष्पेंद्र यादव ने यह साबित कर दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती, बस उन्हें पाने का जज़्बा होना चाहिए। पुष्पेंद्र की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी विद्यालय से हुई। सीमित संसाधनों और साधारण परिस्थितियों के बीच पढ़ाई करते हुए उन्होंने कभी अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई जौनपुर के राधिका इंटर कॉलेज से पूरी की।

वर्ष 2018 में उन्होंने देश की कठिन परीक्षाओं में से एक नीट उत्तीर्ण कर लिया और देश के प्रतिष्ठित संस्थान किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ में एमबीबीएस में प्रवेश पाया। यह उपलब्धि अपने आपमें पूरे गांव के लिए गर्व का क्षण थी। एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद पुष्पेंद्र ने जौनपुर मेडिकल कॉलेज में गवर्नमेंट बॉन्ड पर जूनियर रेजिडेंट के रूप में सेवाएं दीं। कठिन परिश्रम और समर्पण के साथ उन्होंने एमडी पीडियाट्रिक्स (बाल रोग विशेषज्ञ) की डिग्री हासिल किया। अब वह मध्य प्रदेश के दतिया में स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाएं देंगे जहां वह नन्हे-मुन्ने बच्चों के इलाज और स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे।

बता दें कि पुष्पेन्द्र के पिता वीर बहादुर और मां सुनीता देवी के लिए यह पल किसी सपने से कम नहीं है। खेतों में पसीना बहाने वाले पिता की आंखों में आज खुशी के आंसू हैं। उनकी वर्षों की मेहनत और बेटे की तपस्या रंग लाई। पुष्पेंद्र ने यह साबित कर दिया कि यदि मेहनत, लगन और ईमानदारी से पढ़ाई की जाए तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं। आज कुछमुछ गांव ही नहीं, बल्कि पूरा जौनपुर इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है। यह कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोटा समझ लेता है।




