जनपद में फसलों की स्थिति का निर्धारण करने के लिये हो रहा सर्वे


सर्वे से अनुदान, स्कीम का लाभ पहुंचाने में मिलेगी मदद
जौनपुर – जनपद जौनपुर में एग्री स्टैक योजनान्तर्गत कराए जा रहे डिजिटल क्रॉप सर्वे (ई-खसरा पड़लाल) की गति बढ़ गई है। एक सप्ताह में जनपद मे 294295 गाटा सर्वे किया गया, शासन के निर्देश के क्रम में 20 अगस्त से खरीफ फसलों का सर्वे प्रारम्भ हुआ जिसे 5 अक्टूबर तक निर्धारित 2622 गाँवो में कुल 1733553 सर्वे का लक्ष्य पूर्ण करने है।


ई-खसरा पड़ताल में लगे कार्मिकों को प्रेरित करने के फलस्वरुप विगत एक सप्ताह में प्रतिदिन जनपद के सर्वेयरों द्वारा प्रदेश के टॉप- 20 सर्वेयरों में स्थान प्राप्त किया जा रहा है। 21 सितम्बर 2024 को रोशन अली तृतीय तथा अतुल तिवारी ने प्रदेश में चतुर्थ स्थान प्राप्त किए, इसी प्रकार दिनांक 20 सितम्बर 2024 को हर्ष तिवारी प्रदेश में प्रथम, पुनीत पाल ने तृतीय एवं सौरभ पटेल ने राज्य मे पांचवा स्थान प्राप्त किया।19 सितम्बर 2024 को रति यादव ने द्वितीय स्थान, 18 सितम्बर को अशोक यादव ने नौवा स्थान, 16 सितम्बर को पुनीत पाल द्वारा सातवाँ स्थान,14 सितम्बर को सौरभ सिंह ने 15 वा स्थान प्राप्त किया था ।


सभी को जिलाधिकारी डॉ0 दिनेश चंद्र द्वारा अंगवस्त्रम एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है, जिससे अन्य सर्वेयरों को प्रेरणा मिली तथा सभी सर्वेयर द्वारा पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी व लगन से कार्य करते हुए कार्य मे गति दी जा रहा है। एक सप्ताह पूर्व प्रदेश में जनपद की 40वी रैंक थी, वही अब दिनांक 21 सितम्बर 2024 को 22वी रैंक हो गयी है, इसी तरह कार्य करते रहे तो जल्द ही जनपद की रैंक टॉप 10 में आने की पूरी संभावना है।
दिनांक 21 सितम्बर 2024 को प्रदेश में सबसे अधिक 46718 सर्वे जनपद जौनपुर में किया गया, इसी क्रम में 20 सितम्बर को 37638 सर्वे, 19 सितम्बर को 51651 सर्वे, 18 सितम्बर को 39905 सर्वे किया गया, 16 सितम्बर को 42864 सर्वे हुआ, रैंक 30वी, 15 सितम्बर को 33409 सर्वे, रैंक 31 वी तथा 14 सितम्बर को 34556 सर्वे के साथ 40वी रैंक थी।


किसानों को बताया गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों में होने वाले नुकसान से बचाने और किसानों तक सरकारी अनुदान, योजनाओं का लाभ पहुचाने के लिए सरकार डिजिटल क्रोप सर्वे (ई-खसरा पड़ताल) करा रही है। उद्देश्य यह है कि संबंधित डाटा की वास्तविकता का निर्धारण कर एक एकल सत्यापित स्रोत के रूप में ऐसे ईकोसिस्टम व डाटा बेस को विकसित किया जाएगा, जिससे जरूरत पड़ने पर रियल टाईम में स्थितियों का आंकलन किया जा सके,

इसी तरह उपयुक्त योजना तैयार की जा सकें, इसके आधार पर विभागों द्वारा किसानों को योजनाओं का लाभ पहुंचाने, फसलों के मूल्य के निर्धारण में मदद समेत कई महत्वपूर्ण आकड़ो की जानकारी भी मिल सकेगी।

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