
जौनपुर, 20 मई 2026। मुख्य विकास अधिकारी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनुदान संख्या-83 के अंतर्गत बकरी पालन योजना के क्रियान्वयन की जानकारी देते हुए बताया कि जनपद के अनुसूचित जाति के भूमिहीन एवं गरीब पशुपालकों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से योजना लागू की जा रही है।
योजना के तहत प्रति इकाई लागत 60 हजार रुपये निर्धारित की गई है, जिसमें राज्यांश के रूप में 54 हजार रुपये (90 प्रतिशत) तथा लाभार्थी अंश 6 हजार रुपये (10 प्रतिशत) होगा। चयनित लाभार्थियों को 10 प्रतिशत अंशदान जमा करने के बाद शेष धनराशि आरटीजीएस के माध्यम से उनके बैंक खाते में भेजी जाएगी।
योजना का लाभ 18 वर्ष से अधिक आयु के जनपद निवासी अनुसूचित जाति महिला एवं पुरुष बेरोजगार पशुपालकों को मिलेगा, जिनके पास बकरियों को रखने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो। बकरी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त आवेदकों को चयन में वरीयता दी जाएगी। विधवा एवं निराश्रित महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि उपलब्धता के आधार पर 3 प्रतिशत दिव्यांगजन भी शामिल किए जाएंगे।
चयनित लाभार्थी को 10 रुपये के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र देना होगा कि वह बकरी इकाई का संचालन कम से कम तीन वर्षों तक करेगा। खाते में धनराशि मिलने के 20 दिनों के भीतर पशुओं की खरीद कर इकाई को संचालित करना अनिवार्य होगा।
योजना के तहत 55 हजार रुपये से एक नर एवं पांच मादा बकरियों की खरीद की जाएगी। इसमें बरबरी, बीटल, ब्लैक बंगाल सहित अन्य स्थानीय नस्लों की बकरियां शामिल होंगी। पशुओं का क्रय राजकीय अथवा भारत सरकार के बकरी प्रक्षेत्रों से किया जाएगा। अनुपलब्धता की स्थिति में स्थानीय बाजार से क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी की निगरानी में खरीद की जा सकेगी।
शेष 5 हजार रुपये से पशुओं का एक वर्ष का बीमा, परिवहन एवं आवश्यक बर्तन आदि की व्यवस्था की जाएगी। आवेदन पत्र के साथ आधार कार्ड, अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक तथा बकरी पालन प्रशिक्षण प्रमाण पत्र की छायाप्रति संलग्न करना अनिवार्य होगा।


