
आज बहुजन आंदोलन के प्रणेता, BAMCEF, DS-4 और बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक मान्यवर कांशीराम की 20वीं पुण्यतिथि है। 15 मार्च 1934 को पंजाब में जन्मे कांशीराम का निधन 9 अक्टूबर 2006 को दिल्ली में हुआ था।कांशीराम को दलित राजनीति का सबसे बड़ा नायक बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर के बाद माना जाता है। उन्होंने 1964 में डॉ. अम्बेडकर की किताब ‘Annihilation of Caste’ पढ़कर सरकारी नौकरी छोड़ सामाजिक कार्यकर्ता बनने का फैसला किया था। सरकारी दफ्तर में अम्बेडकर जयंती की छुट्टी लेने वाले दलित Withdrawal से भेदभाव देख उन्होंने नौकरी से निलंबित होने तक की परवाह नहीं की।*उनके 3 नारे आज भी जिंदा हैं:1. “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी”2. “वोट हमारा, राज तुम्हारा – नहीं चलेगा”3. “बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय”*उन्होंने खुद कभी कोई पद नहीं लिया। अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें राष्ट्रपति बनने का प्रस्ताव दिया तो उन्होंने ठुकरा दिया और कहा — “मुझे राष्ट्रपति नहीं, दलितों को शासक बनाना है”। मायावती को एक कलेक्टर के सामने फाइल लेकर खड़ी होने वाली लड़की से 4 बार मुख्यमंत्री बनाने वाले वही थे।आज जौनपुर सहित पूरे यूपी में बसपा, आजाद समाज पार्टी और बामसेफ कार्यकर्ता पुष्पांजलि सभा कर रहे हैं। लखनऊ के कांशीराम स्मारक और दिल्ली के प्रेरणा केंद्र पर मुख्य कार्यक्रम है।


